रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में मंगलवार को जल जीवन मिशन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मिशन को “फेल” करार देते हुए सरकार पर पानी आपूर्ति में असमानता और संसाधनों के असंतुलित उपयोग का आरोप लगाया।
बघेल ने पूछा कि वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में जल जीवन मिशन पर कितनी राशि खर्च की गई और कितने घरों तक पानी पहुंचा। जवाब में उपमुख्यमंत्री व जल संसाधन मंत्री अरुण साव ने बताया कि अब तक 15,045 करोड़ रुपये यानी 57% बजट खर्च हो चुका है, और 31.16 लाख घरों में नल से जल की आपूर्ति की जा रही है।
इस पर बघेल ने दावा किया कि डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में केवल 10 लाख नए कनेक्शन दिए गए, जबकि हमारी सरकार ने 21 लाख घरों तक जल पहुंचाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कई घरों में केवल नल लगाए गए हैं, लेकिन जलापूर्ति नहीं हो रही। जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि मौजूदा सरकार ने 20 महीने में सिर्फ 7% काम किया है, जबकि कांग्रेस शासन में 74% काम हुआ था। मंत्री साव ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार में सिर्फ आंकड़े गढ़े गए थे, लेकिन हमने वेरिफिकेशन के बाद वास्तविक जलापूर्ति सुनिश्चित की है।
हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल की मर्यादा बनी रहनी चाहिए और सदन की कार्यवाही को देशभर में देखा जाता है।
इस दौरान भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने जल जीवन मिशन में फर्जीवाड़े और अनुशंसा की गई कार्रवाई पर सवाल उठाया। उपमुख्यमंत्री साव ने बताया कि अब तक 12 अनुबंध रद्द किए गए हैं और जांच जारी है। दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया।
विपक्ष के देवेंद्र यादव ने भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठाया, जिस पर साव ने स्पष्ट किया कि 70% काम पूरा होने से पहले कोई भुगतान नहीं किया जाएगा और इस आशय का पत्र भी जारी किया गया है।