रायपुर। यूपी की भाजपा सरकार द्वारा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना समूचे हिन्दू धर्म का अपमान है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा भगवान शंकराचार्य की सत्ता को चुनौती देने का दुस्साहस कर रही है। किसी भी राजनैतिक दल सरकार मुख्यमंत्री या प्रशासन को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन शंकराचार्य है। उन्होंने कहा, “गुरु-शिष्य परंपरा की एक अटूट परंपरा है जिसके तहत शंकराचार्यों का चुनाव होता है, लेकिन भाजपा सरकार आधी रात को नोटिस जारी कर पूछ रही है कि वह शंकराचार्य हैं या नहीं।”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अविमुक्तेश्वरानंद के सामने सिर झुकाया था, तब वह शंकराचार्य थे? जब तक उन्होंने गोहत्या पर सरकार से सवाल नहीं उठाया, तब तक वह शंकराचार्य थे? जब तक उन्होंने मंदिर के अधूरे प्राण प्रतिष्ठा का विरोध नहीं किया, तब तक वह शंकराचार्य थे? लेकिन अब वह शंकराचार्य नहीं रहे क्योंकि उन्होंने राजा के सामने सिर नहीं झुकाया। इसीलिए आज योगी उनसे दस्तावेज मांग रहे हैं?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि “बीजेपी के लोग मुसलमानों से कागज दिखाने को कहते थे। अब स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि वे एक शंकराचार्य से कागज़ मांग रहे हैं।” सुप्रीम कोर्ट ने 1954 में फैसला सुनाया था कि किसी को भी मठ के कामकाज में दखल देने का अधिकार नहीं है। इसलिए अजय सिंह बिष्ट यानी योगी आदित्यनाथ द्वारा शंकराचार्य जी को भेजा गया नोटिस कानून का उल्लंघन है। राष्ट्रपति को भी शंकराचार्य तय करने का अधिकार नहीं, पूरा देश मोदी और अजय सिंह बिष्ट के मौन को देख रहा है देश शंकराचार्य जी के अपमान के लिये इन्हें कभी माफ नहीं करेगा ।

