Saturday, August 30, 2025
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इंडिया गठबंधन के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी के घोषित होने पर भाजपा बौखला गयी है – दीपक बैज

जस्टिस रेड्डी के फैसले को बहाना बनाकर भाजपा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उंगली उठा रही हैजस्टिस रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट के दो सदस्यी बेंच के जज के रूप में फैसला दिया था ग्रामीणों को हथियार देना असंवैधानिक

रायपुर। इंडिया गठबंधन का उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को बनाये जाने पर भाजपा बौखला गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा को पता है कि उसके उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार रेड्डी के सामने नहीं टिक पा रहे है इसीलिए भाजपा अब स्तरहीन राजनीति पर उतर आई है। भाजपा जस्टिस रेड्डी का बहाना लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर डेढ़ दशक बाद सवाल खड़ा कर रही है, सलवा जुडूम के मामले में जस्टिस रेड्डी ने अकेले फैसला नहीं दिया था यह सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यी बेंच का फैसला था, जिसे न्यायमूर्ति रेड्डी के साथ न्यायमूर्ति एसएस निज्जर की संयुक्त बेंच ने सुनाया था। सलवा जुडूम आंदोलन के समय भाजपा की रमन सरकार ने बिना किसी प्रशिक्षण के ग्रामीणों को घातक हथियार बंदूकें, मशीनगन आदि थमा दिया था, जिसके कारण बस्तर में अराजकता के हालात बन गये थे, उस समय सरकार के इस निर्णय के खिलाफ कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर किया था। इस याचिका में अप्रशिक्षित ग्रामीणों को हथियार थमाने को गलत बताया गया था। फैसले में कहा कि सलवा जुडूम का गठन ‘‘स्थायी आधार पर पर्याप्त संख्या में और उचित रूप से सुसज्जित पेशेवर पुलिस बल रखकर नागरिकों को उचित सुरक्षा प्रदान करने की राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारियों का परित्याग था, केवल राज्य को परिस्थितिवश हिंसा का प्रयोग करने का विशेष अधिकार है, राज्य अपनी इस शक्ति को किसी और को नहीं सौंप सकता।’’ सुप्रीम कोर्ट ने इसी के संबंध में फैसला दिया था कि ग्रामीणों को हथियार नहीं दिया जाना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आया तब राज्य में भाजपा की रमन सरकार थी, उसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पूर्णपीठ में याचिका क्यों नहीं दायर किया? आज जब उस बेंच के एक जज विपक्ष के साझा उम्मीदवार बन गये है तो भाजपा फैसले पर सवाल खड़ा कर रही है। बस्तर में आदिवासियों को आपस में लड़ाने का षड़यंत्र रचा, भोले-भाले ग्रामीणों को हथियार थमा कर नक्सलियों के सामने खड़ा कर दिया था। अप्रशिक्षित हथियारधारी ग्रामीण खूंखार नक्सली आमने-सामने हो गये थे जिसके हजारों की संख्या में ग्रामीण मारे जा रहे थे। भाजपा अवसरवादी दल है उसने सलवा जुडूम के समय भी आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कांग्रेस नेता महेन्द्र कर्मा को अकेला छोड़ दिया था। आज भी भाजपा सलवा जुडूम के नाम पर राजनीति करना चाह रही।

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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस ने नक्सलवाद का दंश झेला है। उसने झीरम में अपने नेताओं की पूरी पीढ़ी खोई है। सलवा जुडूम आंदोलन एक जन आंदोलन था इसका समर्थन कांग्रेस के तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष महेन्द्र कर्मा ने भी किया था। भाजपा उन्हीं महेन्द्र कर्मा को सुरक्षा नहीं दे पाई और वे नक्सली आतंक का शिकार हो गये। भाजपा ने तो 15 साल नक्सलवाद के नाम पर केवल भ्रष्टाचार किया। भाजपा के राज में ही नक्सलवाद का विस्तार तीन ब्लॉक से 14 जिलों तक हुआ। भाजपा के बड़े-बड़े नेता नक्सलियों के मददगार के रूप में पकड़ाते रहे है।

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