Saturday, August 30, 2025
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राजधानी में हिट एंड रन का मामला

रायपुर/STARNEWS| पूरे देश में लगातार तेज रफ्तार वाहन चलाना एक फैशन के तौर पर गिना जाने लगा है। मोटर वाहन अधिनियम में ऐसी कोई बड़ी धारा नहीं है जिससे हिट एंड रन कर किसी के जीवन का अंत करने वाले वाहन चालक के ऊपर कठोर कार्रवाई की जाए। जिसका भरपूर फायदा ऊंची पहुंच और रसूखदार उठाते हैं। देश के अनेक राज्यों में इस तरह की घटनाएं सामने आई है, परन्तु जिस पर आज तक किसी भी अपराधी को कठोर कारावास की सजा नहीं दी गई है, मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 304 और 304 A  के तहत ही  पुलिस कार्यवाही करती आयीं है। कुछ हफ्ते पहले पूणे में हुए एक इसी तरह के मामले में वहां नौकरी कर रहे दो मध्यप्रदेश के निवासीयों की एक तेज रफ्तार कार के नाबालिक चालक ने ठोकर मारने से मौत हो गई थी।

इसी तरह का एक मामला राजधानी रायपुर में कल फिर दर्ज किया गया है, जहां 26 मई को तेलीबांधा पुलिस थाना क्षेत्र में रिंग रोड नंबर एक पर ट्रैफिक सिग्नल क्रॉस करते हुए एक तेज रफ्तार कार CG 04 NR 0313 चालक ने लापरवाही पूर्ण वाहन चलाते हुए सुनील नामदेव नाम के व्यक्ति को सामने से जबरदस्त ठोकर मार दी जिससे वह दूर जा गिरा, सड़क पर गिरने से उसके चेहरे सहित शरीर के अन्य हिस्सों में चोट लग लगी थी। घायल के पुत्र की तरफ से तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज की है जिस पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 279 और 337 का मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एक्सीडेंट करने वाले वाहन को जप्त कर लिया है वही इस दुर्घटना में शामिल वाहन चालक जिसका नाम अब्दुल हफीज उर्फ राजा जो संजय नगर टिकरापारा थाना क्षेत्र का निवासी है।

पुलिस ने उसे अज्ञात बताया है, वाहन मालिक के नाम को भी उल्लेखित नहीं किया है। यह बात इस और इंगित करती है, कि पुलिस भी इस तरह के मामले में पूरी तरह से संजीदा होकर अपना कार्य नहीं करती है। तेलीबांधा थाना क्षेत्र में लगातार हिट और रन का ये चौथा मामला है|

इससे पहले एक भाजपा नेता के बेटे ने देर रात पान की दुकान से निकल रहे एक व्यक्ति को इतनी जबरदस्त ठोकर मारी थी कि वह हवा में उछलकर 20 फीट दूर जा गिरा था वहीं कुछ दिन पहले एक कर चालक में दो लोगों को बुरी तरह से कुचल दिया था और मौके से भाग गया था। उसे कर चालक के ऊपर भी अब तक कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है। अब गौर करने वाली बात है कि लगातार इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने वाले आरोपियों को न्यायालय किस तरह की सजा सुनाता है या फिर उनकी अपनी पहुंच उन्हें ऐसे गैर जिम्मेदाराना अपराध के लिए केवल फाइन देकर छोड़ देता है।

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